Sunday, 11 November 2012

सबूत



हवा कुनमुना रही   पत्तों पर 
चिडियों ने
चोंच में दबा रखी  आवाज
बादलों में सीझ गईं  पानी की बूदें
और
पृथ्वी धीरे –धीरे
बदल रही है अपने घाव का रंग

सबने
धीरे –धीरे छोड़ दीं उम्मीदें

अब हमें देना होगा
अपने आदमी होने का सबूत
फिर से .....

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